
प्रभास भारतीय सिनेमा के उन चुनिंदा अभिनेताओं में से हैं जिन्होंने क्षेत्रीय फिल्मों की सीमाओं को तोड़कर पैन-इंडिया और वैश्विक स्तर पर पहचान बनाई। उनका पूरा नाम उप्पलापाटी वेंकट सूर्य नारायण प्रभास राजू है। प्रभास का जन्म 23 अक्टूबर 1979 को तमिलनाडु के चेन्नई शहर में हुआ, हालांकि उनका मूल निवास आंध्र प्रदेश के पश्चिम गोदावरी जिले में स्थित है। वे एक प्रतिष्ठित फिल्मी परिवार से आते हैं। उनके पिता उप्पलापाटी सूर्य नारायण राजू तेलुगु फिल्म इंडस्ट्री के प्रसिद्ध फिल्म निर्माता थे। इसी कारण बचपन से ही प्रभास का सिनेमा से गहरा जुड़ाव रहा, हालांकि वे स्वभाव से शांत, संकोची और निजी जीवन को निजी रखने वाले व्यक्ति रहे हैं।
प्रभास की प्रारंभिक शिक्षा चेन्नई और हैदराबाद में हुई। उन्होंने श्री चैतन्य कॉलेज, हैदराबाद से अपनी पढ़ाई पूरी की। पढ़ाई के दौरान प्रभास का झुकाव खेलों की ओर भी था और वे फिटनेस को लेकर हमेशा सजग रहे। लंबा कद, मजबूत कद-काठी और सहज व्यक्तित्व उन्हें शुरू से ही अलग पहचान देता था। अभिनय के क्षेत्र में आने का उनका निर्णय अचानक नहीं था, बल्कि यह परिवारिक माहौल और सिनेमा के प्रति उनके भीतर पनपती रुचि का स्वाभाविक परिणाम था।
प्रभास ने अपने अभिनय करियर की शुरुआत वर्ष 2002 में तेलुगु फिल्म “ईश्वर” से की। यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर बहुत बड़ी सफलता नहीं बन पाई, लेकिन प्रभास की स्क्रीन प्रेजेंस और संभावनाओं को दर्शकों और समीक्षकों ने नोटिस किया। शुरुआती दौर में उन्हें संघर्ष करना पड़ा और खुद को साबित करने के लिए अलग-अलग तरह की भूमिकाएं निभानी पड़ीं। इसके बाद “राघवेंद्र” (2003) और “वर्षम” (2004) जैसी फिल्मों ने उन्हें तेलुगु सिनेमा में एक उभरते हुए स्टार के रूप में स्थापित किया। विशेष रूप से “वर्षम” ने प्रभास को व्यापक लोकप्रियता दिलाई और उनके करियर को नई दिशा दी।
साल 2005 से 2009 के बीच प्रभास ने कई सफल फिल्मों में काम किया, जिनमें “छत्रपति”, “पूर्नामी”, “बिल्ला” और “एक निरंजन” जैसी फिल्में शामिल हैं। फिल्म “छत्रपति” में उनके दमदार एक्शन और संवाद अदायगी ने दर्शकों को खासा प्रभावित किया। वहीं “बिल्ला” में उन्होंने स्टाइलिश और ग्रे शेड वाले किरदार को निभाकर यह साबित किया कि वे सिर्फ एक्शन ही नहीं बल्कि स्वैग और करिश्मा भी बखूबी निभा सकते हैं। इस दौर में प्रभास ने खुद को एक भरोसेमंद स्टार के रूप में स्थापित कर लिया था।
हालांकि प्रभास के करियर का सबसे बड़ा और ऐतिहासिक मोड़ तब आया जब उन्हें निर्देशक एस. एस. राजामौली की महत्वाकांक्षी फिल्म “बाहुबली” में मुख्य भूमिका के लिए चुना गया। “बाहुबली: द बिगिनिंग” (2015) और “बाहुबली: द कन्क्लूजन” (2017) ने न केवल भारतीय सिनेमा बल्कि वैश्विक फिल्म उद्योग में भी नए कीर्तिमान स्थापित किए। बाहुबली के किरदार के लिए प्रभास ने अपनी शारीरिक बनावट, अभिनय और समर्पण का अभूतपूर्व उदाहरण पेश किया। उन्होंने इस भूमिका के लिए वर्षों तक कठोर प्रशिक्षण लिया, अपने शरीर को विशेष रूप से ढाला और किरदार में पूरी तरह डूब गए। बाहुबली सीरीज़ की सफलता ने प्रभास को पैन-इंडिया सुपरस्टार बना दिया और वे देश-विदेश में पहचाने जाने लगे।
बाहुबली की अपार सफलता के बाद प्रभास पर अपेक्षाओं का बोझ भी बढ़ गया। इसके बाद उन्होंने “साहो” (2019) जैसी बड़ी बजट की एक्शन थ्रिलर फिल्म में काम किया, जो हिंदी, तेलुगु और तमिल में एक साथ रिलीज़ हुई। फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर मिश्रित प्रतिक्रिया पाई, लेकिन प्रभास की स्टार पावर और एक्शन अवतार ने दर्शकों को आकर्षित किया। इसके बाद “राधे श्याम” (2022) में उन्होंने एक रोमांटिक भूमिका निभाई, जो उनके एक्शन-प्रधान इमेज से अलग थी। हालांकि फिल्म को वैसी सफलता नहीं मिली जैसी अपेक्षा थी, फिर भी प्रभास ने यह दिखाया कि वे अलग-अलग शैलियों में प्रयोग करने से नहीं हिचकिचाते।
प्रभास का करियर केवल सफलता और असफलता की कहानी नहीं है, बल्कि यह निरंतर प्रयोग, मेहनत और आत्मविश्वास की मिसाल है। उन्होंने “आदिपुरुष” (2023) जैसी पौराणिक फिल्म में भगवान राम से प्रेरित किरदार निभाया, जो उनके करियर का एक और महत्वपूर्ण अध्याय था। इस फिल्म को लेकर विवाद और चर्चाएं भी हुईं, लेकिन प्रभास ने हर परिस्थिति में संयम और गरिमा बनाए रखी। इसके बाद वे “सलार” जैसी फिल्मों में नजर आए, जिसने उनके एक्शन स्टार की छवि को और मजबूत किया।
व्यक्तिगत जीवन की बात करें तो प्रभास हमेशा मीडिया की चकाचौंध से दूर रहे हैं। वे अपने निजी संबंधों और पारिवारिक मामलों पर सार्वजनिक रूप से कम ही बात करते हैं। उनके विवाह को लेकर समय-समय पर अफवाहें जरूर उड़ीं, लेकिन प्रभास ने हमेशा अपने काम को प्राथमिकता दी। वे अपने परिवार के बेहद करीब हैं और अपनी मां के साथ उनका विशेष लगाव है। सादगी, विनम्रता और शांत स्वभाव उनके व्यक्तित्व की सबसे बड़ी विशेषताएं हैं।
प्रभास अपनी दरियादिली और सहकर्मियों के प्रति सम्मान के लिए भी जाने जाते हैं। फिल्म सेट पर वे एक सहयोगी कलाकार के रूप में पहचाने जाते हैं। कई सह-कलाकारों और तकनीशियनों ने उनकी तारीफ करते हुए बताया है कि प्रभास बेहद जमीन से जुड़े और मददगार इंसान हैं। वे अक्सर अपनी फिल्मों की टीम के लिए बड़े भोज का आयोजन करते हैं और सभी को परिवार की तरह मानते हैं।
पुरस्कारों और सम्मानों की बात करें तो प्रभास को उनके करियर में कई प्रतिष्ठित पुरस्कार और नामांकन मिले हैं। बाहुबली सीरीज़ के लिए उन्हें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहा गया। भले ही वे पुरस्कारों की दौड़ में ज्यादा रुचि न रखते हों, लेकिन दर्शकों का प्यार ही उनके लिए सबसे बड़ा सम्मान रहा है। सोशल मीडिया पर भी उनकी जबरदस्त फैन फॉलोइंग है, जो उन्हें हर नई फिल्म के साथ और मजबूत बनाती है।
प्रभास का योगदान केवल अभिनय तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्होंने भारतीय सिनेमा को वैश्विक मंच पर पहचान दिलाने में भी अहम भूमिका निभाई है। बाहुबली के बाद भारतीय फिल्मों को जिस तरह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में देखा जाने लगा, उसमें प्रभास की भूमिका को नकारा नहीं जा सकता। उन्होंने यह साबित किया कि भाषा की सीमाएं प्रतिभा और मेहनत के सामने टिक नहीं पातीं।
आज प्रभास भारतीय फिल्म उद्योग के सबसे बड़े सितारों में गिने जाते हैं। वे एक ऐसे अभिनेता हैं जिन्होंने संघर्ष, समर्पण और निरंतर मेहनत के दम पर यह मुकाम हासिल किया है। उनका सफर नए कलाकारों के लिए प्रेरणा है कि धैर्य, अनुशासन और अपने काम के प्रति ईमानदारी से किसी भी ऊंचाई को छुआ जा सकता है। आने वाले वर्षों में भी प्रभास से दर्शकों को कई भव्य और यादगार फिल्मों की उम्मीद है, और यह कहना गलत नहीं होगा कि प्रभास का स्वर्णिम दौर अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है, बल्कि वे लगातार नए शिखरों की ओर बढ़ रहे हैं।