
Sushant Singh Rajput भारतीय सिनेमा के उन चुनिंदा कलाकारों में से एक थे जिन्होंने अपने प्रतिभा, बुद्धिमत्ता, अनुशासन और अथक परिश्रम के दम पर यह सिद्ध किया कि सपनों की कोई भौगोलिक सीमा नहीं होती। उनका जन्म 21 जनवरी 1986 को बिहार की राजधानी पटना में एक मध्यमवर्गीय परिवार में हुआ। उनके पिता कृष्ण कुमार सिंह एक सरकारी अधिकारी थे और माता उषा सिंह एक गृहिणी थीं। सुशांत अपने परिवार में सबसे छोटे थे और अपनी चार बहनों के बेहद करीब थे। बचपन से ही वे जिज्ञासु, मेधावी और अंतर्मुखी स्वभाव के थे। पढ़ाई में उनकी विशेष रुचि गणित और भौतिकी जैसे विषयों में थी। स्कूल के दिनों में ही उन्होंने कई प्रतियोगी परीक्षाएँ उत्तीर्ण कीं और इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा में भी उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। उन्होंने दिल्ली कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग (अब दिल्ली टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी) में मैकेनिकल इंजीनियरिंग में प्रवेश लिया, जहाँ वे पढ़ाई के साथ-साथ नृत्य और रंगमंच की गतिविधियों में भी सक्रिय रहने लगे। इसी दौरान उनके भीतर कला के प्रति छिपा जुनून धीरे-धीरे आकार लेने लगा। वे श्यामक डावर की डांस क्लास से जुड़े और पेशेवर नृत्य प्रशिक्षण प्राप्त किया। उन्होंने कई बड़े अवार्ड समारोहों और मंचीय प्रस्तुतियों में बैकग्राउंड डांसर के रूप में भी भाग लिया। इंजीनियरिंग की पढ़ाई के दौरान ही उनका मन अभिनय की ओर अधिक आकर्षित होने लगा और अंततः उन्होंने तीसरे वर्ष में पढ़ाई छोड़कर अभिनय के क्षेत्र में पूर्णकालिक करियर बनाने का निर्णय लिया। यह निर्णय आसान नहीं था, क्योंकि एक स्थिर करियर छोड़कर अनिश्चितताओं से भरी दुनिया में कदम रखना साहस की बात थी, लेकिन सुशांत ने जोखिम उठाया और अपने सपनों को प्राथमिकता दी।
मुंबई पहुँचने के बाद उन्होंने नादिरा बब्बर के एक थिएटर ग्रुप से जुड़कर अभिनय की बारीकियाँ सीखीं। थिएटर ने उन्हें मंच पर आत्मविश्वास, संवाद-अभिव्यक्ति और चरित्र की गहराई को समझने की क्षमता दी। संघर्ष के शुरुआती दिनों में उन्होंने कई ऑडिशन दिए, अस्वीकृतियाँ झेलीं, लेकिन हार नहीं मानी। धीरे-धीरे उन्हें टेलीविजन में छोटे रोल मिलने लगे। उन्हें धारावाहिक “किस देश में है मेरा दिल” में काम करने का अवसर मिला, जहाँ उनकी स्क्रीन उपस्थिति ने निर्माताओं का ध्यान आकर्षित किया। इसके बाद उन्हें एक बड़ा अवसर मिला लोकप्रिय धारावाहिक Pavitra Rishta में मुख्य भूमिका निभाने का। इस शो में उन्होंने मानव देशमुख का किरदार निभाया, जो सरल, संवेदनशील और जिम्मेदार युवक था। यह किरदार दर्शकों के दिलों में बस गया और सुशांत रातोंरात घर-घर में पहचाने जाने लगे। उनकी अभिनय शैली स्वाभाविक और भावनात्मक रूप से सशक्त थी, जिसने उन्हें अन्य टीवी अभिनेताओं से अलग पहचान दी। उन्होंने डांस रियलिटी शो “जरा नचके दिखा” और “झलक दिखला जा” में भी भाग लिया, जहाँ उनके नृत्य कौशल और मंचीय व्यक्तित्व की प्रशंसा हुई।
टेलीविजन में सफलता पाने के बाद उन्होंने फिल्मी दुनिया में कदम रखने का निर्णय लिया। वर्ष 2013 में फिल्म Kai Po Che! से उन्होंने बॉलीवुड में पदार्पण किया। यह फिल्म चेतन भगत के उपन्यास “द 3 मिस्टेक्स ऑफ माय लाइफ” पर आधारित थी और इसमें सुशांत ने ईशान भट्ट का किरदार निभाया, जो एक प्रतिभाशाली क्रिकेटर और कोच होता है। उनके अभिनय की समीक्षकों ने खुलकर प्रशंसा की और उन्हें सर्वश्रेष्ठ नवोदित अभिनेता के लिए कई पुरस्कारों में नामांकन मिला। उसी वर्ष उनकी दूसरी फिल्म Shuddh Desi Romance रिलीज हुई, जिसमें उन्होंने आधुनिक सोच वाले युवक का किरदार निभाया। इस फिल्म ने युवा पीढ़ी के रिश्तों और प्रतिबद्धताओं को नए दृष्टिकोण से प्रस्तुत किया। इसके बाद वे आमिर खान अभिनीत फिल्म PK में दिखाई दिए, जहाँ उनका किरदार छोटा होते हुए भी प्रभावशाली था। उन्होंने फिल्म Detective Byomkesh Bakshy! में एक जासूस की भूमिका निभाई, जो 1940 के दशक की पृष्ठभूमि पर आधारित थी। इस फिल्म में उन्होंने गंभीर, बुद्धिमान और रहस्यमय व्यक्तित्व को जीवंत किया।
वर्ष 2016 में आई फिल्म M.S. Dhoni: The Untold Story उनके करियर का मील का पत्थर साबित हुई। इस फिल्म में उन्होंने भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान Mahendra Singh Dhoni का किरदार निभाया। इस भूमिका के लिए उन्होंने महीनों तक कड़ी ट्रेनिंग ली, क्रिकेट की बारीकियाँ सीखीं, विकेटकीपिंग और बल्लेबाजी का अभ्यास किया तथा धोनी की शारीरिक भाषा, बोलने के अंदाज और व्यक्तित्व को गहराई से समझा। उनके समर्पण का परिणाम यह हुआ कि दर्शकों को पर्दे पर वास्तविक धोनी की झलक दिखाई दी। यह फिल्म व्यावसायिक रूप से भी अत्यंत सफल रही और सुशांत को व्यापक लोकप्रियता मिली। इसके बाद उन्होंने “राब्ता”, “केदारनाथ” और “सोनचिड़िया” जैसी फिल्मों में अलग-अलग प्रकार की भूमिकाएँ निभाईं। “केदारनाथ” में उन्होंने एक मुस्लिम पिट्ठू (कांधा पर यात्री ढोने वाला) का किरदार निभाया, जो 2013 की त्रासदी की पृष्ठभूमि पर आधारित प्रेम कहानी थी। “सोनचिड़िया” में वे डकैत के रूप में दिखाई दिए, जहाँ उन्होंने अपने अभिनय से यह सिद्ध किया कि वे चुनौतीपूर्ण भूमिकाएँ निभाने से नहीं डरते।
साल 2019 में आई फिल्म Chhichhore ने युवाओं और छात्रों के बीच गहरी छाप छोड़ी। यह फिल्म इंजीनियरिंग कॉलेज के दोस्तों की कहानी थी, जो जीवन में असफलताओं से जूझते हैं और फिर उठ खड़े होते हैं। फिल्म का संदेश था कि आत्महत्या किसी समस्या का समाधान नहीं है और जीवन अनमोल है। विडंबना यह रही कि बाद में यही संदेश लोगों को और भी अधिक भावुक कर गया। उनकी अंतिम फिल्म Dil Bechara थी, जो उनके निधन के बाद रिलीज हुई। यह फिल्म हॉलीवुड की “द फॉल्ट इन आवर स्टार्स” का हिंदी रूपांतरण थी और इसमें उन्होंने एक ऐसे युवक का किरदार निभाया जो जीवन को खुलकर जीने में विश्वास करता है, भले ही परिस्थितियाँ कठिन क्यों न हों। फिल्म को दर्शकों ने अपार प्रेम दिया और इसे उनकी भावनात्मक विदाई के रूप में देखा गया।
अभिनय के अलावा सुशांत का व्यक्तित्व बहुआयामी था। वे विज्ञान, खगोलशास्त्र, अंतरिक्ष, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और नई तकनीकों में गहरी रुचि रखते थे। उन्होंने अपने सपनों की एक सूची बनाई थी, जिसमें 50 इच्छाएँ शामिल थीं—जैसे अंतरिक्ष में जाना, बच्चों को कोडिंग सिखाना, महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देना, और पर्यावरण संरक्षण के लिए काम करना। उन्होंने चाँद पर एक जमीन का टुकड़ा खरीदा था और एक उन्नत टेलीस्कोप के माध्यम से रात में आकाश का अवलोकन करते थे। वे नियमित रूप से किताबें पढ़ते थे और सोशल मीडिया पर विज्ञान एवं दर्शन से जुड़े विचार साझा करते थे। वे मानते थे कि जीवन का उद्देश्य केवल प्रसिद्धि पाना नहीं, बल्कि ज्ञान अर्जित करना और समाज में सकारात्मक बदलाव लाना है।
14 जून 2020 को मुंबई के बांद्रा स्थित उनके निवास पर उनका निधन हो गया। यह खबर पूरे देश के लिए गहरा सदमा लेकर आई। उनके निधन ने मानसिक स्वास्थ्य, अवसाद, फिल्म उद्योग के दबाव और सामाजिक अपेक्षाओं जैसे मुद्दों पर व्यापक चर्चा को जन्म दिया। लाखों प्रशंसकों ने सोशल मीडिया पर उन्हें श्रद्धांजलि दी। उनके परिवार, मित्रों और सहकर्मियों ने उन्हें एक संवेदनशील, विनम्र और जिज्ञासु व्यक्ति के रूप में याद किया। उनकी मृत्यु के बाद भी उनकी लोकप्रियता कम नहीं हुई, बल्कि लोग उनके जीवन और विचारों को और गहराई से समझने लगे।
सुशांत सिंह राजपूत की कहानी केवल एक अभिनेता की सफलता की कहानी नहीं है, बल्कि यह एक छोटे शहर के युवा की यात्रा है जिसने अपने दम पर बड़े सपने देखे और उन्हें साकार किया। उन्होंने यह साबित किया कि यदि व्यक्ति में प्रतिभा, परिश्रम और दृढ़ संकल्प हो तो वह किसी भी बाधा को पार कर सकता है। वे उन लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा हैं जो साधारण पृष्ठभूमि से आते हैं लेकिन असाधारण सपने देखते हैं। उनकी मुस्कान, उनकी जिज्ञासा, उनका ज्ञान के प्रति प्रेम और उनकी फिल्मों के माध्यम से दिया गया संदेश आज भी लोगों के दिलों में जीवित है। वे भले ही शारीरिक रूप से हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी कला, उनके विचार और उनकी प्रेरणादायक यात्रा सदैव स्मरणीय रहेगी और आने वाली पीढ़ियों को यह सिखाती रहेगी कि जीवन में हर दिन सीखना, आगे बढ़ना और सपनों का पीछा करना ही सच्ची सफलता है।
सुशांत सिंह राजपूत एक ऐसा नाम है जिसने भारतीय फिल्म उद्योग और टेलीविजन जगत में अपनी एक विशिष्ट पहचान बनाई। उनका जन्म 21 जनवरी 1986 को बिहार के पटना में हुआ था। वह एक मध्यमवर्गीय परिवार से ताल्लुक रखते थे और उनके पिता एक सरकारी कर्मचारी थे। सुशांत अपनी पांच भाई-बहनों में सबसे छोटे थे और उनका अपनी माँ के साथ गहरा लगाव था, जिनकी मृत्यु 2002 में हो गई थी। उनकी प्रारंभिक शिक्षा पटना के सेंट करेन हाई स्कूल में हुई, जिसके बाद वे उच्च शिक्षा के लिए दिल्ली आ गए। वे पढ़ाई में अत्यंत मेधावी थे और उन्होंने दिल्ली कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग (DCE) में दाखिला लिया, लेकिन अभिनय और नृत्य के प्रति उनके जुनून ने उन्हें अपनी डिग्री पूरी करने से पहले ही इस क्षेत्र की ओर मोड़ दिया।
सुशांत के करियर की शुरुआत श्यामक डावर के डांस ग्रुप से हुई, जहाँ उन्होंने बैकग्राउंड डांसर के रूप में काम किया। इसके बाद वे मुंबई चले गए और प्रसिद्ध थिएटर ग्रुप ‘एकजुट’ में शामिल हुए। उनका टेलीविजन डेब्यू ‘किस देश में है मेरा दिल’ से हुआ, लेकिन उन्हें असली पहचान एकता कपूर के धारावाहिक ‘पवित्र रिश्ता’ से मिली। इस शो में मानव देशमुख के उनके किरदार ने उन्हें घर-घर में लोकप्रिय बना दिया और उन्हें कई पुरस्कार भी दिलाए। उनकी सादगी और अभिनय क्षमता ने उन्हें टीवी का एक बड़ा सितारा बना दिया, लेकिन उनके सपने बड़े थे और वे बड़े पर्दे पर अपनी कला का प्रदर्शन करना चाहते थे।
2013 में फिल्म ‘काय पो छे!’ के साथ उन्होंने बॉलीवुड में कदम रखा और अपनी पहली ही फिल्म से आलोचकों का दिल जीत लिया। इसके बाद उन्होंने ‘शुद्ध देसी रोमांस’, ‘पीके’ और ‘डिटेक्टिव ब्योमकेश बख्शी!’ जैसी फिल्मों में अपनी विविधता दिखाई। उनके करियर का सबसे महत्वपूर्ण मोड़ 2016 में आया जब उन्होंने भारतीय क्रिकेटर महेंद्र सिंह धोनी की बायोपिक ‘एम.एस. धोनी: द अनटोल्ड स्टोरी’ में मुख्य भूमिका निभाई। इस फिल्म के लिए उन्होंने धोनी के हाव-भाव और खेलने की शैली को इतनी सटीकता से अपनाया कि हर कोई दंग रह गया। इसके बाद ‘केदारनाथ’, ‘सोनचिड़िया’ और ‘छिछोरे’ जैसी फिल्मों ने उनके अभिनय के स्तर को और ऊंचा किया।
अभिनय के अलावा, सुशांत एक जिज्ञासु व्यक्तित्व के धनी थे। उन्हें खगोल विज्ञान (Astronomy), क्वांटम फिजिक्स और दर्शनशास्त्र (Philosophy) में गहरी रुचि थी। उनके पास एक बेहद आधुनिक टेलिस्कोप था जिससे वे अक्सर तारों और ग्रहों को देखा करते थे। वे एक ऐसे अभिनेता थे जिन्होंने चाँद पर जमीन खरीदी थी और वे अपनी डायरी में अपने 50 सपनों की सूची बनाकर उन्हें पूरा करने के लिए प्रयासरत रहते थे। वे परोपकारी भी थे और उन्होंने आपदाओं के समय करोड़ों रुपये दान किए।
14 जून 2020 को सुशांत सिंह राजपूत की असामयिक मृत्यु ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया। उनकी मृत्यु की खबर ने न केवल बॉलीवुड बल्कि उनके प्रशंसकों और सामान्य जनता के बीच एक गहरा शून्य पैदा कर दिया। वे अपनी अंतिम फिल्म ‘दिल बेचारा’ की रिलीज नहीं देख सके, जो उनकी मृत्यु के बाद रिलीज हुई और जिसे दर्शकों का अपार प्यार मिला। सुशांत सिंह राजपूत भले ही आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनका काम, उनकी मुस्कान और ज्ञान के प्रति उनकी जिज्ञासा हमेशा उनके चाहने वालों के दिलों में जीवित रहेगी।
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